पुराने ट्रेन को हटाकर अब देश में नए तकनीक की ट्रेन चलाई जा रही है. पहले वन्दे भारत फिर नमो भारत और अब हाइड्रोजन ट्रेन. रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लगातार बड़े बड़े प्रोजेक्ट को सफल बनाया जा रहा है. हाइड्रोजन ट्रेन उसी प्रोजेक्ट में से एक है. इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है की यह ट्रेन प्रदुषण नहीं करती है. कोई धुंवा नहीं निकलता है. यह भारत की पहली पर्यावरण अनुकूल ट्रेन है.

वैसे तो इस हाइड्रोजन ट्रेन की चर्चा पिछले कई वर्षो से हो रही है. लगातार ट्रायल किये जा रहे है. लेकिन लेटेस्ट ट्रायल फाइनल स्टेज की ट्रायल थी. यह 100% सफल रही. यह ट्रायल कई राउंड में किया गया. पहले राउंड में हाइड्रोजन की स्पीड 85 km/घंटा रखा गया. दूसरी राउंड में 100 की रफ़्तार से ट्रेन चला कर देखा गया तीसरी में 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार और चौथे में 120 की रफ़्तार से ट्रेन को सफलतापूर्वक अपने गंतव्य तक पहुचाया गया.

ट्रायल के वक्त कई रेल अधिकारी मौजूद थे. सभी ने पाया की वायरिंग , बैलेंसिंग, सिग्नल सिस्टम , ब्रकिंग सिस्टम सभी मानक काफी सटीक थे. यह ट्रेन दिल्ली और सोनीपत के बीच की गई. सुबह के 9:10 यह ट्रेन शुरू हुआ था. फिर कई राउंड में ट्रायल के बाद दिल्ली और सोनीपत की बिच इस हाइड्रोजन ट्रेन को चलाया गया. जब यह ट्रेन कमर्शियल शुरू होगी तो इस ट्रेन को नमो ग्रीन रेल कहा जायेगा. इस ट्रेन को नेट जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

इस ट्रेन में कुल 10 कोच थे. सभी DEMU कोच लगे हुए थे. इस ट्रेन की कुल क्षमता 2400 kW है. ट्रायल के दौरान ब्रैकिंग सिस्टम पर पूरा जोर दिया गया. 120 की रफ़्तार से अचानक ब्रेक लगाकर ट्रेन की स्थिरता को देखा गया. वर्तमान में सिर्फ ट्रायल भी संपन्न हुआ है. अभी कमर्शियल ट्रेन नहीं चलाया गया है. रेल मंत्रालय से आर्डर आने पर सबसे पहले दिल्ली जींद सोनीपत के रूट पर इस ट्रेन को चलाया जा सकता है.

Madhav, a seasoned journalist with three years of extensive experience in news writing, editing, and reporting, is currently making his mark at newsfatafat.com. His journey in journalism, characterized...