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: युद्ध अभ्यासों में राफेल एफ-35 तक को भी हर चूका है
: अभी भारत के पास 30 स्क्वाड्रन है और चाहिए 42

मौजूदा भारतीय वायु सेना में लड़ाकू विमानों की कमी है ये सभी जानते है और इन कमियों को पूरा करने के लिए भारत की सेना को कई फाइटर जेट्स की जरूरी है. आपको बता दे की इंडियन एयरफोर्स के पास 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है लेकिन अभी भारतीय वायु सेना के पास सिर्फ 30 स्क्वाड्रन बचे हैं. और अब भारत फ़्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने वाला है जिसकी चर्चा हो रही है और ज्यादा राफेल विमान भारत में निर्माण भी होगा. 114 राफेल को लेकर बीते दिनों रक्षा मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा गया था.

धयान देंने वाली बात यह है की भारतीय वायु सेना के इस प्रस्ताव मंत्रालय का कहना है की अभी और विस्तृत जानकारी जुटाए. उसके बाद एयरफोर्स के पास प्रस्ताव लौटा दिया गया. राफेल फाइटर जेट्स को दुनिया के बेहतरीन फाइटर जेट्स में से एक माना जाता है. राफेल ने कई मौकों पर अपनी श्रेष्ठता दिखाई है. इतना ही नही कई युद्ध अभ्यासों के दौरान राफेल ने अमेरिकी 5वीं पीढ़ी के सबसे बेस्ट फाइटर जेट एफ-35 तक को लॉक किया था. इसी के चलते इस जेट के वीरता पर कोई सवाल नही उठाता.

मौजूदा समय में भारतीय वायु सेना के पास फ्रांस निर्मित राफेल के दो स्क्वाड्रन मतलब 36 फाइटर जेट्स हैं. इसको भारत सरकार ने 2016 में डील किया था उसके बाद ये जेट भारत की सेना को मिली. इसके बाद भारत अपनी नौसेना के लिए भी 26 मरीन राफेल की डील की है. सबसे बड़ा अर्चन यह है की इस जेट की कीमत क्या होगी. फ्रांस के साथ 114 राफेल विमानों की डील में सबसे बड़ा पेंच इसकी कीमत है. अगर यह डील हो गई है भारत के लिए यह सबसे बड़ा रक्षा सौदा हो जाएगा. 114 राफेल फाइटर जेट्स की कीमत 1.75 लाख करोड़ से लेकर दो लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है.

अगर यह डील होती है तो भारतीय वायु सेना के पास 2035 तक कोई पैसा नहीं होगा. इसमें सबसे बड़ी समस्या यह होगी की भारत की अहम प्रोजेक्ट देसी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोजेक्ट AMCA है. साल 2028 तक AMCA के प्रोटोटाइप तैयार होने की उम्मीद है. ऐसे में इसका जवाब अब किसी के पास नही है की इसका पैसा कहां से आएगा. मेक इन इंडिया राफेल यानी की इस डील के तहत भारत की योजना राफेल जेट को भारत में ही बनाया जाए. ताकि भारत के लोगों को रोजगार भी मिल सके. भारत में राफेल विमान को बनाने के लिए राफेल को बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन और भारत की टाटा एडवांस सिस्टम्स लिमिटेड ने समझोता भी किया है. इसके लिए हैदाराबाद में एक प्लांट को लगाया जाए और हर साल प्लांट से 24 जेट बनाया जाए.

राफेल के डील में सबसे बड़ी समस्या में इसका सोर्स कोड है, जोकि कंपनी ने अभी तक किसी भी राफेल खरीदने वालों को इसका सोर्स कोड नही दिया है. इतना ही नही भारत चाहता है कि राफेल को बनाने वाली कंपनी भारत में राफेल के इंजन एम88 को बनाए. जोकि फ्रांस कोर इंजन तकनीक देंने से पीछे हट रहा है. भारत अभी तक ताकतवर देसी फाइटर जेट इंजन नही बना सका.

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