सुशांत मौत मामले में NCB को नहीं मिला कोई सुराग, क्या रास्ते से भटक गई जांच एजेंसी

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में अन्य एजेंसियो की तरह नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानि एनसीबी के हाथ भी कुछ नहीं लगा है. यहां तक कि एनसीबी इस मामले में बड़ी मछलियों तक भी नहीं पहुंच पाई है. कानून के आला जानकारों का मानना है कि एनसीबी जांच का सुंशात की मौत से कोई लेना देना नहीं है और सुशांत की मौत को लोग अपने अपने फायदे के लिए भुना रहे है.

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानि एनसीबी ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर एक मामला दर्ज किया. पहले पकड़े छोटे मोटे ड्रग पेडलर और फिर शुरू हो गया एक ऐसी पूछताछ का सिलसिला जिसमें नाम तो कई बड़े सितारों के बताए गए, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी पूछताछ से सुशांत की मौत का कोई रहस्य सुलझना ही नही था. यहां तक नारकोटिक्स मामलों की जांच करने वाले धुरंधर अधिकारी भी मानते हैं कि एनसीबी इस मामले में अपने लक्ष्य से भटक गई. पूर्व वरिष्ठ आईपीएस और सीबीआई में नारकोटिक्स ब्रांच के पूर्व प्रभारी दिवाकर प्रसाद के मुताबिक एनसीबी की जांच और सुशांत की मौत का मामला अपने आप में अलग अलग केस है. इसका सुशांत की मौत से कोई लेना देना नहीं है. एनसीबी को ये जांच करनी चाहिए थी कि होलसेल सप्लाई कहां से आ रही है, लेकिन वो तो दस ग्राम और बीस ग्राम के मामले पकड़ने में लगी हुई है. पूर्व डीजी का मानना है कि एनसीबी इस मामले में अपने चार्टर से ही भटक गया है.

एनसीबी ने इस मामले में अनेक फिल्मी हीरोइनों से भी खूब पूछताछ कर सुर्खियां बटोरीं. कभी दीपिका पादुकोण तो कभी कोई और. यहां तक कि आए दिन एनसीबी ऑफिस से किसी ना किसी फिल्मी सितारे से पूछताछ की खबरें लीक होती रहीं, लेकिन वो काम नहीं हुआ जो सुशांत को इंसाफ दिलाता. मसलन ना तो कोई बड़ी मछली पकड़ी गई और ना ही कोई ठोस सबूत सामने आया. सीबीआई नारकोटिक्स के पूर्व प्रमुख दिवाकर प्रसाद के मुताबिक इस मामले में थोक व्यापारी कौन है? एनसीबी ये जांच करती तो खुशी होती. एविडेंस क्या है? वाट्सएप चैट? जिसके बारे में एक्ट्रेस ने कहा कि कोड भाषा है, ना आप सप्लाई प्रूव कर पायेंगे ना आप ट्रांजैक्शन प्रूव कर पायेंगे ना कोई मेडिकल एविडेंस है. यदि ये लोग किसी रेव पार्टी मे पकड़े गए होते तो मेडिकल परीक्षण भी होता. मुझे नहीं लगता कि कुछ साबित कर पायेंगे. कोर्ट मे सबूत पेश करना अलग बात है. कोई ड्रग रिकवरी नहीं है. कोई मेडिकल एग्जामिनेशन नहीं.

सूत्रों की मानें तो सुंशात मामले में एनसीबी ने सुंशात को इंसाफ दिलाने की जगह केवल पब्लिसिटी बटोरने का काम किया. सच्चाई यही है कि इस मामले में जो एफआईआर 15 बटा 20 दर्ज की गई थी, उसमें एनसीबी के हाथ खाली हैं और वो केवल रिया की गिरफ्तारी कर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि मगरमच्छों पर शायद हाथ डालना तो दूर हाथ रख भी नहीं पा रही है. कानून के जानकारों का मानना है कि यदि एनसीबी यह साबित भी कर दे कि कोई ड्रग पीता है, तो ऐसे मामलों में भी बेहद मामूली सजा या केवल जुर्माने का प्रावधान है. यही कारण है कि पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि सुशांत मामले को लोग अपने फायदे के हिसाब से प्रयोग में ला रहे हैं. पूर्व डीजी दिवाकर प्रसाद के मुताबिक ये मामला पूरी तरह से राजनैतिक उद्देश्य के लिए होता चला गया. सुशांत मामले में मैने देखा दो नमूने कह रहे हैं कि 200 प्रतिशत हत्या का मामला है, लोग इस मामले में अपनी पब्लिसिटी और फायदा देख रहे हैं. किसी राजनैतिक पार्टी की निगाह उन पर पड़ जाए और एक सज्जन जो रोज टीवी पर बयान देते थे, वो आ भी गए. हां वो पुलिस अधिकारी हैं और पुलिस अधिकारी को ऐसा नहीं करना चाहिए.

सूत्रों की मानें तो एनसीबी ने इस मामले में एक चर्चित हुए वीडियो को फिर से फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है और एनसीबी यह जानना चाहता है कि उस वीडियो में जो टॉर्च जलती दिखाई दे रही है वो टॉर्च है या कुछ और. सुशांत मामले में सीबीआई को अब तक हत्या का कोई सबूत नहीं मिला. ईडी को 15 करोड़ रुपये नहीं मिले और एनसीबी की जांच का आलम यह है कि जिस सुशांत को इंसाफ दिलाने के लिए मुकदमा दर्ज किया गया था, वो इंसाफ कहां गया? कहां गए नशे के बडे़ सौदागर और इस मामले में शामिल बड़ी मछलियां. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सुशांत की मौत केवल एक रहस्य बनकर रह जायेगी या लोगों के सामने कभी असली सच भी आयेगा.