कांटों पर सोकर देते हैं सच और आस्था की परीक्षा, खुद को बताते हैं पांडवों का वंशज, जानें क्या है पूरा मामला

आस्था के नाम पर मध्य प्रदेश के बैतूल में एक बेहद ही हैरान कर देने वाला खेल खेला जा रहा है। दरअसल, यहां पर खुद को पांडवों का वंशज कहने वाले रज्जड़ समाज के लोग देवी को खुश करने के लिए कांटों की सेज पर लेटते हैं।

अपनी मन्नत पूरी कराने और देवी को खुश करने के लिए खुशी-खुशी कांटों की सेज पर लेटते हैं। रज्जड़ समाज के लोगों की मानें तो ऐसा करने से देवी प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं।

इस मामले के सामने आने से हर कोई हैरान है। बता दें कि बैतूल जिला स्थित सेहरा गांव में हर साल अगहन मास में रज्जड़ समाज के लोग इस परंपरा को निभाते हैं।

इन लोगों का कहना है कि हम पांडवों के वंशज हैं। पांडवों ने कुछ इसी तरह से कांटों पर लेटकर सत्य की परीक्षा दी थी। इसलिए रज्जड़ समाज इस परंपरा को सालों से निभाता आ रहा ह।

इन लोगों का मानना है कि कांटों की सेज पर लेटकर वो अपनी आस्था, सच्चाई और भक्ति की परीक्षा देते हैं। ऐसा करने से भगवान खुश होते हैं और उनकी मनोकामना भी पूरी होती है।