मीटिंग में किसानों ने क्या मांगें रखीं और सरकार से क्‍या मिला जवाब?

सरकार ने मंगलवार को नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों की मांगों पर गौर करने के लिए एक समिति गठित करने की पेशकश की.

सरकार के इस प्रस्ताव पर आंदोलनरत 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की ओर से ठंडी प्रतिक्रिया मिली. किसान संगठन तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. आइए आसान शब्दों में समझें कि आज की बैठक में किसानों और सरकार के बीत क्या बातचीत हुई

किसानों की मांगें
आंदोलनरत किसानों की तरफ से बैठक में शामिल हुए किसान नेताओं की एक राय थी कि तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए. किसानों के प्रतिनिधियों ने इन कानूनों को कृषक समुदाय के हित के खिलाफ करार दिया. किसानों ने कहा कि समिति का कोई मतलब नहीं.

सरकार की तरफ से ये मसले को हल करने की नहीं बल्कि टालने की कोशिश है. उन्होंने मांग की कि MSP को लिखित कानूनी जामा पहनाया जाए. उन्होंने कहा कि हम बातचीत से नहीं भाग रहे, लेकिन जब तक हल नहीं निकलता तब तक आंदोलन जारी रहेगा. 

सरकार ने क्या कहा? 
सरकार की तरफ से कहा गया कि आपको बिल में जो खामियां लगती हैं उन्हें सिलसिलेवार ढंग से लिखकर दें. अगली बैठक में खामियां लेकर आएं फिर उस पर बात की जाएगी. सरकार चाहती है कि एक समिति बनाई जाए,

जिसमें किसानों के 5 से 6 प्रतिनिधि हों और उसमें अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ भी हों. सरकार का ये भी कहना है कि तीनों बिल किसानों के हित में हैं फिर भी यदि आपको लगता है कि बिल में खामियां हैं तो लिखित में लाइए. हम उसपर चर्चा करने के लिए तैयार हैं. अगली बैठक 3 दिसंबर (गुरुवार) को होगी.