समस्तीपुर: घर का कचरा नाले में और नाले का सड़क पर आने से हो रही परेशानी

नाले का कीचड़ सड़क पर, पर जब वो सूख न जाए। कीचड़ की धूल शहरवासियों को बीमार कर रही है। सिस्टम को इसकी जानकारी है, लेकिन रोकने की दिशा में कोई रुचि नहीं है।

यही वजह है कि सालों से यह ‘खेल’ चल रहा है। लोग अपने घर एवं दुकान की सफाई कर कचरे को नाले में डाला देते हैं। नगर परिषद नाले की सफाई कर कीचड़ सड़क पर फैला देता है।

कचरा डालने से नाला जाम हो जाता है और उसका गंदा पानी सड़क पर बहने लगता है। वहीं नाले से निकाल कर सड़क पर फैलाया गया कचरा सूख कर धूल बन जाता है और लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है।

अब सवाल उठता है किए ऐसी सफाई किस काम की जो फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। सड़क पर बहते नाले के पानी एवं कचरे की धूल से वातावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है, लोगों की सेहत को भी नुकसान पहुंच रहा है। गर्द-गुबार में जीना दुश्वार

नगर परिषद द्वारा नाला उड़ाही कर कीचड़ को सड़क पर छोड़ दिया जाता है। सड़क पर पड़ा कीचड़ सूखकर धूल बन शहरवासियों का जीना दुश्वार कर देता है।

यह न सिर्फ लोगों के घरों में पहुंच जाता है बल्कि शहरवासियों की सांस के साथ उनके शरीर में पहुंच नुकसान पहुंचा रहा है। नालों से कीचड़ निकाल सीधे उसका निष्पादन करने में निगम अक्षम है।

नालों को बना दिया है कूड़ेदान

घर एवं दुकान की सफाई करके के उपरांत निकले कचरे को सीधे नाला में डाला दिया जाता है। लोगों की इस लापरवाही से नालों का बहाव अवरुद्ध हो जाता है और सड़क पर गंदे पानी का जमाव हो जाता हैं। वायु प्रदूषण के मुख्य कारण व उनसे उत्पन्न रोग

सड़कों पर उड़ने वाली धूल से लोग अधिक एलर्जी का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा आंख में जलन, खुजली व लालीमापन आना भी आम बात हो गई है। कई लोग धूल के कण जाने पर आंख को रगड़ देते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए।