भूल कहें या लापरवाही, बिना दरवाजा निकाले बना दिया एक करोड़ का भवन

बांसवाड़ा जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर के साथ 25 बैड क्षमता वाला सर्जिकल वार्ड एक करोड़ की लागत से बना दिया लेकिन इसमें ऐसी तकनीकी गलती अब सामने आई है जो मजाक बनकर रह गई है।

निर्माण एजेंसी के अभियंता इस वार्ड का मुख्य दरवाजा बनाना ही भूल गए और ऐसे में अब इसमें वार्ड के पिछवाड़े आपातकाल में निकलने के लिए बनाए ढाई फिट के दरवाजे से आया-जाया जा सकता है लेकिन स्ट्रेचर तथा अन्य मशीनों को ले जाना संभव नहीं।

बड़ी तकनीकी खामी को लेकर चर्चा जोरों पर 

पिछले साल राज्य सरकार ने बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय के आउटडोर के उपर 25 बैड क्षमता वाला सर्जिकल वार्ड के निर्माण की अनुमति प्रदान की थी। जिसके साथ ऑपरेशन थिएटर का निर्माण किया जाना था। इसके लिए एक करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था और इसके निर्माण की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को सौंपी गई थी।

वार्ड का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है लेकिन अब बड़ी तकनीकी खामी नजर आई है। जिसको लेकर चर्चा जोरों पर है कि यह लापरवाही है या बड़ी भूल। बिना डिजायन कराए गए इस निर्माण में वार्ड में आवाजाही के लिए दरवाजा बनाना ही भूल गए, जबकि आपातकाल के लिए पिछवाड़े में ढाई फिट का दरवाजा रखा गया है। जहां से जरूरत की मशीनों तथा स्ट्रेचर ले जाना आसान नहीं। 

क्रेन के जरिए वार्ड और ऑपरेशन थिएटर के निर्माण की सामग्री पहुंचाए जाने से निर्माण कार्य के ठेकेदार को भी दरवाजा निर्माण की भूल पता नहीं चली और काम पूरा हो गया। इस मामले में महात्मा गांधी चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल भाटी का कहना है कि निर्माण के दौरान रही खामी की ओर ध्यान नहीं गया।

इमरजेंसी से रास्ता निकालना संभव नहीं है। हालांकि इस वार्ड तक पहुंचने के लिए रास्ता तलाशा जा रहा है लेकिन फिलहाल ऐसी कोई जगह सामने नहीं आ रही। पिछवाड़े रखे दरवाजे को बड़ा कर वहां पहुंच बनाने का विकल्प है लेकिन यह लंबा पड़ेगा।

Posted by Raushan Kumar