सौभाग्य योजना में भ्रष्टाचार की खुली पोल- बिना बिजली कनेक्शन के पास करवा लिए 29 करोड़ के बिल

हर घर बिजली कनेक्शन (सौभाग्य) योजना में भ्रष्टाचार की पोल मंडला-डिंडौरी के बाद कई दूसरे जिलों में खुल रही है। अभी सीधी, सिंगरौली और सतना के बाद जांच का दायरा शहडोल संभाग में पहुंच गया है। शहडोल समेत उमरिया और अनूपपुर जिले में सौभाग्य योजना में घोटाले के आरोप लगे हैं। इसकी जांच बिजली कंपनी ने शुरू करवा दी है। मुख्य अभियंता शहडोल संभाग को जांच के संदर्भ में नोडल अधिकारी बनाया गया है।

शिकायतकर्ता उमरिया जिले के जनप्रतिनिधि हैं, उन्होंने आरोप लगाया कि सौभाग्य योजना के तहत शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिले में कागजों में काम हुए हैं। ठेकेदारों ने बिजली अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी बिल पास करवाए। इसके लिए लाखों रुपये का लेनदेन हुआ। दावे के अनुसार ज्यादातर घरों में बिजली ही नहीं पहुंची जबकि कागजों में घरों को रोशन बताया गया है। ऊर्जा विभाग को भेजी गई शिकायत के बाद पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने इस मामले में जांच करवाने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले कंपनी को मंडला–डिंडौरी और सीधी, सिंगरौली जिले में करीब 29 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला मिला है। इस मामले में 21 से ज्यादा अधिकारियों को नोटिस भी जारी हो चुका है।

क्या है मामला

पूर्व क्षेत्र कंपनी में सौभाग्य योजना में ग्रामीण इलाकों के हर घर को बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। केन्द्र सरकार की इस योजना में 998 करोड़ रपए का बजट आया। करीब 900 करोड़ रपए काम में खर्च हुए। कार्यपालन अभियंता सीधे स्तर पर ठेकेदारों से काम करवाते रहे। मर्जी से काम हुआ। दावा किया गया कि इस अभियान में करीब सात लाख घरों को बिजली से जो़़डा गया। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद ही स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने इस मामले से पर्दा उठाना शुरू किया। कई जगह खराब गुणवत्ता के उपकरण लगाए गए। घरों में बिजली पहुंचाए बिना ही उन्हें रोशन करने का दावा किया। ऊर्जा विभाग के निर्देश मामले की जांच शुरू करवाई गई।

Source = jagaran